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शनिवार, 1 अप्रैल 2017

31 मार्च के बाद क्या होगा आपकी पुरानी गाड़ी का और क्या है BS-3

31 मार्च के बाद क्या होगा आपकी पुरानी गाड़ी का और क्या है BS-3

आइये विस्तार से समझते है.....

'BS' मतलब Bharat Stage. भारत में प्रदूषण बड़ी समस्या है. इसका एक बड़ा हिस्सा आता है गाड़ियों से निकलने वाले धुएं से. इसे काबू में करने के लिए अब तक चार स्टेज में नियम लाए गए हैं. सुप्रीम कोर्ट का ताज़ा आदेश चौथे स्टेज याने कि BS-IV को लेकर है. ये स्टैंडर्ड केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तय करता है. ये बोर्ड रिपोर्ट करता है अनिल माधव दवे के केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय को. हमारे यहां के स्टैंडर्ड यूरोप के नियमों जैसे ही हैं. यूरोप का Euro III हमारे यहां का BS III है.
बुलेट वाले नए नियमों पर खास ध्यान दें, उनकी गाड़ी बहुत धुआं फेंकती है.

गाड़ी जब चलती है तब इंजन के अंदर तेल जलता है: पेट्रोल या डीज़ल. हर इंजन की एक एफिशियंसी होती है. कोई इंजन पूरा तेल नहीं जला पाता. तो अधजले तेल से धुआं निकलता है, जिसमें हानिकारक गैसें होती हैं जैसे नाइट्रोजन ऑक्साइड, कार्बन मोनोक्साइड. यही प्रदूषण होता है.

फैसला आने से पहले लोचा हो गया था. गाड़ी कंपनियों को BS IV वाले इंजन बनाने में ज्यादा खर्चा लगता इसीलिए वो डेट बढ़ाने के लिए कोर्ट चले गए. कहा कि गाड़ियां बेचन के लिए वक्त मिलना चाहिए. पर कोर्ट ने कहा कि ‘लोगों की सेहत कंपनियों के नफे-नुकसान से ज़्यादा महत्वपूर्ण है, इसलिए डेट आगे नहीं बढ़ेगी.’

अब BS III गाड़ियों का क्या होगा?

BS III गाड़ियों को मॉडिफाई कर BS IV नहीं बनाया जा सकता. लेकिन ऐसा नहीं है कि BS IV आ जाने से सारी पुरानी गाड़ियों को बैन कर दिया जाएगा. सरकार के सॉलिसिटर जनरल ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि सरकार फिलहाल देश में BS III गाड़ियां चलने देगी. देश में चल रही  गाड़ियों में एक बहुत बड़ी संख्या BS III गाड़ियों की ही है. तो अगर आपकी गाड़ी BS III है तो फिलहाल चिंता की बात नहीं है. इनके बारे में सरकार आगे फैसला लेगी.

पुरानी गाड़ियों के रीसेल पर भी फिलहाल कोई रोक नहीं लगी है. बस इतना ध्यान रखें कि अगर आप कोई सेकंड हैंड BS III गाड़ी खरीदें तो उसकी सेल डेट (जिस दिन उसे शोरूम से खरीदा गया) 31 मार्च 2017 से पहले की हो. वर्ना आप उसे अपने नाम से रजिस्टर नहीं कर पाएंगे.

कैसे पता करें कि आपकी गाड़ी कौन सी है?

अलग-अलग कंपनियों ने अपने हिसाब से BS IV गाड़ियां बनाना शुरू किया. इसलिए मैनुफैक्चरिंग के साल के आधार पर बताना मुश्किल है कि गाड़ी कौन सी है. लेकिन मोटा-माटी ये समझें कि BS IV गाड़ी अप्रैल 2010 के बाद की ही होगी. हमारी सलाह है कि आप गाड़ी के साथ आए यूज़र मैन्यूअल में देखें. उसमें साफ-साफ लिखा होता है कि आपकी गाड़ी कौन से स्टेज के हिसाब से बनी है.

ये फैसला ऐसा है जिसका मुंह खोलकर विरोध करना मुश्किल है. इसीलिए ऑटोमोबाइल कंपनियां ‘सहमति’ की बात कर रही हैं. लेकिन साफ है कि देश की ज़्यादातर ऑटोमोबाइल कंपनियों को कोर्ट के इस फैसले से बड़ा नुकसान होने वाला है.
इस ज़माने की गाड़ियां बहुत प्रदूषण फैलाती थीं.

इंडिया में ये नियम कब शुरू हुए?

हिंदुस्तान में प्रदूषण के स्टैंडर्ड पहली बार 1991 में आए. पहले पेट्रोल फिर डीज़ल गाड़ियों के लिए नियम आए. इसके बाद अप्रैल 1995 में देश के चार बड़े शहरों – दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई में कारों में कैटेलिटिक कन्वर्टर लगाने का नियम बना. ये धुएं में हानिकारक गैसों की मात्रा कम करता है. इसी साल सीसारहित (अनलीडेड) पेट्रोल की बिक्री शुरू हुई. फिर ये स्टेज लागू किये गए:

पहला स्टेजः
2000 में कारों और कमर्शियल वाहनों के लिए ‘Euro I’ मानकों के आधार पर ‘India I’ मानक लागू किए गए. इसी के अगले साल देश की पहली ऑटो फ्यूल पॉलिसी की घोषणा की गई. हम यूरोप से थोड़ा पीछे चले हैं. यूरोप में ‘Euro I’ मानक 1993 में ही आ गए थे.

दूसरा स्टेजः
ये 2001 में 13 बड़े शहरों में लागू हुआ. ये Euro II के बराबर था. इस स्टेज के साथ ‘Bharat Stage’ नाम आया. इसे  BS II कहा गया. लेकिन पूरे देश में इन्हें लागू कराने में 4 साल लग गए.

पहली धूम की बाइक्स पहला स्टेज की थीं.

तीसरा स्टेजः
अप्रैल 2005 में 13 बड़े शहरों में फोर-व्हीलर गाड़ियों के लिए BS III मानक लागू किए गए. इसी के साथ बाकी देश में BS II लागू हुआ.

चौथा स्टेजः
देश के 13 बड़े शहरों में अप्रैल 2010 से BS IV लागू हुआ. बाकी देश में BS-III लागू हुआ. इसी साल अक्टूबर में इस लिस्ट में 20 शहर और जोड़े गए. 1 अप्रैल 2017 पूरे देश में BS IV लागू होने की तारीख थी.

गाड़ी कंपनियों से हर स्टेज में इंजन में कुछ बदलाव करने के लिए कहा गया. इसके साथ ही देश भर की तेल रिफाइनरीज़ को कम प्रदूषण वाले फ्यूल बनाने को कहा गया. इसमें 2010 से लेकर अब तक 30 हजार करोड़ रुपये लग चुके हैं. इसके बाद 2020 में BS V छोड़कर सीधा BS VI आने वाला है.

तो कुल जमा बात ये है कि घबराने की बात नहीं है. अगर आपके पास पुरानी गाड़ी है, तो आप उसे फिलहाल बिंदास चलाते रहें. बस ध्यान रखें कि आपकी गाड़ी के लिए कौन से नए नियम सामने आते हैं|

रविवार, 5 मार्च 2017

फाँसी का समय सूरज निकलने के पहले क्यो किया जाता है ?

ये तीन सवाल है? अगर आप सही जवाब दे दे , तो उम्मीद है कि आप हर परीक्षा पास कर सकते है.
1 फाँसी का समय सूरज निकलने के पहले क्यो किया जाता है ? किसी और समय में क्यो नही दी जाती है?
2 वो कौन सी चीज है जो आपके पास हो तो विवाह नही हो सकता है और न हो तो अन्तिम संस्कार नही हो सकता है?
3 अगर किसी लड़की की लाश मिले तो कैसे मालूम करोगे कि वह लडकी किस जाति की है?
रिप्लाई मस्ट ””””””””””
जिसको भी फारवर्ड कर सकते है, करीए और जबाब तलाश कीजिए ।
आपको चैलेंज है 24 घटे के भीतर आप अपने साथी दोस्तों को भेजे
आपका समय अब शुरु हुआ।
व्हाट्सएप के एक्सस्पर्ट हो तो उत्तर दे।



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जवाब-

01. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि फंसी के पहले भी कैदी का मेडिकल चेकअप होता है और सुबह सुबह स्वास्थ ठीक होने की सम्भावना अधिक होती हैं। साथ ही फंसी के बाद भी कई औपचारिकताएं होती है जैसे कन्फर्म करना की कैदी की मौत हो गयी है, पोस्टमॉर्टम और लाश को घर वालों के हवाले करना। इन सारे प्रोसेस में भी टाइम लगता है और घर वालों को भी बॉडी अँधेरे होने से पहले देना होता है ताकि उसका अंतिम संस्कार कर सकें।

02. मृत्यु प्रमाण पत्र (Death Certificate) सरकार के नियम अनुसार समशान घाठ या अन्य जगह जहाँ लाश को जलाया या दफनाया जाता है आप को मृत्यु प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना पड़ता है। और मृत्यु प्रमाण पत्र आप को तभी मिलेगा जब आप मर चुके हो। तो अब मरे हुए आदमी या औरत का विवाह तो नही हो सकता। मतलब साफ है अगर आप के पास मृत्यु प्रमाण पत्र है तो आप की शादी नहीं हो सकती और अगर नही है तो आपकी अंतिम संस्कार नही हो सकता।

03. सायद आप लोग CID नहीं देखते। अब लाश तो बोलेगी नही वो किस जाती की है। पर फिर भी उसके पहनावे से पता लगाया ही जा सकता है। इससे भी पता ना चले तो फॉरेंसिक डिपार्टमेंट और CID की मदद से उसके फॅमिली वालों का पता लगाना पड़ेगा तब जा के जात पता चलेगी। 

मंगलवार, 10 जनवरी 2017

प्रेम शु छे??

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वृद्धाश्रम श्रेष्ठ विकल्प

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*स्वच्छता पर अलग अलग निबंध-6*

स्वच्छता पर निबंध

नरेन्द्र मोदी केस्वच्छ भारत अभियानके उद्देश्य को पूरा करने के लिये एक बड़ा कदमहो सकता है हर भारतीय नागरिक का एक छोटा सा कदम। रोजमर्रा के जीवन में हमें अपने बच्चों को साफ-सफाई के महत्व और इसके उद्देश्य को सिखाना चाहिये। यहाँ पर हम कई लघु और बड़े निबंध आपके स्कूल जाने वाले छोटे बच्चों के लिये उपलब्ध करा रहे है चलिये इसके माध्यम से हम स्वच्छता को उनके जीवन का हिस्सा बनाये।

स्वच्छता पर निबंध 1 (100 शब्द)

स्वच्छता एक ऐसा कार्य नहीं है जो हमें दबाव में करना चाहिये। ये एक अच्छी आदत और स्वस्थ तरीका है हमारे अच्छे स्वस्थ जीवन के लिये। अच्छे स्वास्थ्य के लिये सभी प्रकार की स्वच्छता बहुत जरुरी है चाहे वो व्यक्तिगत हो, अपने आसपास की, पर्यावरण की, पालतु जानवरों की या काम करने की जगह  (स्कूल, कॉलेज आदि) हो। हम सभी को निहायत जागरुक होना चाहिये कि कैसे अपने रोजमर्रा के जीवन में स्वच्छता को बनाये रखना है। अपनी आदत में साफ-सफाई को शामिल करना बहुत आसान है। हमें स्वच्छता से कभी समझौता नहींकरना चाहिये, ये जीवन में पानी और खाने की तरह ही आवश्यक है। इसमें बचपन से ही कुशल होना चाहिये जिसकी शुरुआत केवल हर अभिभावक के द्वारा हो सकती है पहली और सबसे बड़ी जिम्मेदारी है के रुप में।

स्वच्छता पर निबंध 2 (150 शब्द)

साफ-सफाई एक अच्छी आदत है जो स्वच्छ पर्यावरण   और आदर्श जीवन शैली के लिये हर एक के पास होनी चाहिये। हमारे प्रधानमंत्री ने स्वच्छता अभियान शुरु किया है जिसे “स्वच्छ भारत” या “स्वच्छ भारत अभियान 2013 ” कहा जाता है। हमें ये समझना चाहिये कि ये केवल हमारे प्रधानमंत्री का कार्य नहीं है, बल्कि ये समाज में  रहने वाले हर इंसान की जिम्मेदारी है। हम सब के स्वस्थ जीवन के लिये इस अभियान में हमें मिलकर भाग लेना चाहिये।इसकी शुरुआत घरों, स्कूलों, कालेजों, समुदायों, कार्यालयों, संस्थानों से हो जिससे कि देश में व्यापक स्तर पर स्वच्छ भारत क्रांति हो। हमें खुद को, घर, अपने आसपास, समाज, समुदाय, शहर, उद्यान और पर्यावरण आदि को रोज स्वच्छ रखने की जरुरत है। हम सभी को स्वच्छता का ध्येय, महत्व तथाजरुरत को समझना चाहिये और इसे अपने दैनिक जीवन में लागू करना करना चाहिये। कई क्रियाओं के द्वारा स्कूलों में बच्चों के बीच स्वच्छता को प्रचारित किया जाता है जैसे स्कूल परिसरों की सफाई, क्लासरुम की सफाई, लैब की सफाई, स्वच्छता पर पोस्टर बनाना, गंदगी को अलग करना, निबंध लिखना, स्वच्छता पर पेंटिंग बनाना, कविता पाठन, समूह चर्चा, डॉक्यूमेंटरी वीडियों आदि।

स्वच्छता पर निबंध 3 (200 शब्द)

स्वच्छता हर एक की पहली और प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिये। सभी को ये समझना चाहिये कि खाने और पानी की तरह ही स्वच्छताभी बेहद आवश्यक है। बल्कि, हमें स्वच्छता को खाने और पानी से ज्यादा प्राथमिकता देनीचाहिये। हम केवल तभी स्वस्थ रह सकते है जब हम सब कुछ बहुत सफाई और स्वास्थ्यकर तरीके से लें। बचपन सभी के जीवन का सबसे अच्छा समय होता है जिसके दौरान स्वच्छता की आदत में कुशल हो सकते है जैसे चलना, बोलना, दौड़ना, पढ़ना, खाना आदि अभिभावक के नियमित निगरानी और सतर्कता के साये में हो।स्कूल और कॉलेजों में स्वच्छता के विभिन्न प्रकारों के विषय पर विद्यार्थीयों को बहुत सारे होमवर्क दिये जाते है। आज के दिनों में ये बहुत ही महत्वपूर्ण विषय है, क्योंकि एक बहुत बड़ी जनसंख्या स्वच्छता के अभाव में बीमारी की वजह से रोज मर रही है। इसलिये, हमें जीवन में स्वच्छता के महत्व और जरुरत के बारे में जागरुक होना बेहद आवश्यक है। हजारों जीवन को बचाने और उन्हें स्वस्थ जीवन देने के लिये हम सभी कोमिलकर स्वच्छता की ओर कदम बढ़ाने की जरुरत है। हमारे प्रधानमंत्री, नरेन्द्र मोदी ने एक अभियान चलाया जिसे “स्वच्छ भारत” कहा गया। भारतीय नागरिक के रुप में हम सभी को इस अभियान के उद्देश्य और लक्ष्य को पूरा करने में सक्रिय रुप से भाग लेना चाहिये।

स्वच्छता पर निबंध 4 (250 शब्द)

स्वच्छता एक ऐसा कार्य नहीं है जो पैसा कमाने के लिये किया जाए बल्कि, ये एक अच्छी आदत है जिसे हमें अच्छे स्वास्थ्य और स्वस्थ जीवन के लिये अपनाना चाहिये। स्वच्छता सबसे पुण्य का कार्य है जिसे जीवनका स्तर बढ़ाने के लिये एक बङी जिम्मेदारी के रुप में हर एक को अनुकरण करना चाहिये। हमें अपनी व्यक्तिगत स्वच्छता, पालतु जानवरों की स्वच्छता, पर्यावरण की स्वच्छता, अपने आस-पास की स्वच्छता, और कार्यस्थल की स्वच्छता आदि करनी चाहिये। हमें पेड़ों को नहीं काटना चाहिये और पर्यावरण को स्वच्छ बनाए रखने के लिये पेड़लगाना चाहिये।ये कोई बाध्यकारी कार्य नहीं है लेकिन हमेंइसे शांतिपूर्ण तरीके से करना चाहिये। ये हमें मानसिक, शारीरिक, समाजिक और बौद्धिक रुप से स्वस्थ रखता है। सभी के साथ मिलकर लिया गया कदम एक बड़े कदम के रुप में परिवर्तित हो सकता है। जब एक छोटा बच्चा सफलतापूर्वक चलना, बोलना, दौड़ना सीख सकता है, और यदि अभिभावक के द्वारा इसको बढ़ावा दिया जाए तो वो बहुत आसानी से स्वच्छता की आदत को बचपन से ग्रहण कर सकता है। तर्जनी के द्वारा माता-पिता अपने बच्चे को चलना सीखाते है क्योंकि ये पूरे जीवन को जीने केलिये बहुत जरुरी है। उन्हें जरुर समझना चाहिये कि स्वच्छता एक स्वस्थ जीवन और लंबीआयु के लिये भी बहुत जरुरी होता है इसलिये उन्हे अपने बच्चों में साफ-सफाई की आदत को डालना चाहिये। अपने बच्चों में स्वच्छता को लाना एक बड़ा कदम होगा। अत: अब पूर्ण स्वच्छता हमसे बहुत दूर नहीं है। ये केवल एक पीड़ी से 4 से 5 साल दूर है क्योंकि आधुनिक काल में हमारे छोटे से बच्चे बहुत समझदार है सभी चीजों को समझने के लिये।

स्वच्छता पर निबंध 5 (300 शब्द)

स्वच्छता एक अच्छी आदत है जो हम सभी के लिये बहुत जरुरी  है। अपने घर, पालतू जानवर, अपने आस-पास, पर्यावरण, तालाब, नदी, स्कूल आदि सहित स्वच्छता एक आदत है खुद को शारीरिक और मानसिक तौर पर स्वच्छ रखने की। हमें हर समय अपने आपको शुद्ध, स्वच्छ और अच्छे से कपड़े पहन कर रहना चाहिये। ये समाज में अच्छे व्यक्तित्व और प्रभाव को बनाने में मदद करता है क्योंकि ये आपके अच्छे चरित्र को दिखाता है। धरती पर हमेशा के लिये जीवन को संभव बनाने के लिये अपने शरीर की सफाई के साथ पर्यावरण और प्राकृतिकसंसाधनों (भूमि, पानी, खाद्य पदार्थ आदि) कोभी बनाए रखना चाहिये।स्वच्छता हमें मानसिक, शारीरिक, सामाजिक औरबौद्धिक हर तरीके से स्वस्थ बनाता है। सामान्यत:, हमने हमेशा अपने घर में ये ध्यानदिया है कि हमारी दादी और माँ पूजा से पहले स्वच्छता को लेकर बहुत सख्त होती है, ये कोईअलग बात नहीं है, वो बस साफ-सफाई को हमारी आदत बनाना चाहती है। लेकिन वो गलत तरीका अपनाती है क्योंकि वो स्वच्छता के उद्देश्य और फायदे को नहीं बताती है इसी वजह से हमें स्वच्छता का अनुसरण करने में समस्या आती है। हर अभिवावक को तार्किक रुप से स्वच्छता के उद्देश्य, फायदे और जरुरत आदि के बारे में अपने बच्चों से बात करनी चाहिये। उन्हे जरुर बताना चाहिये कि स्वच्छता हमारे जीवन में खाने और पानी की तरह पहली प्राथमिकता है।अपने भविष्य को चमकदार और स्वस्थ बनाने के लिये हमें हमेशा खुद का और अपने आसपास के पर्यावरण का ख्याल रखना चाहिये। हमे साबुन से नहाना, नाखुनों को काटना, साफ और इस्त्रीकिये हुए कपड़े आदि कार्य रोज करना चाहिये।घर को  कैसे स्वच्छ और शुद्ध बनाए ये हमें अपने माता-पिता से सीखना चाहिये। हमें अपनेआसपास के वातावरण को साफ रखना चाहिये ताकि किसी प्रकार की बीमारी न फैले। कुछ खाने सेपहले और खाने के बाद साबुन से हाथ धोना चाहिये। हमें पूरे दिन साफ और शुद्ध पानी पीना चाहिये, हमें बाहर के खाने से बचना चाहिये साथ ही ज्यादा मसालेदार और तैयार पेय पदार्थों से परहेज करना चाहिये।

स्वच्छता पर निबंध 6 (400 शब्द)

स्वच्छता एक क्रिया है जिससे हमारा शरीर, दिमाग, कपड़े, घर, आसपास और कार्यक्षेत्र साफ और शुद्ध रहते है। हमारे मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिये साफ-सफाई बेहद जरुरी है। अपने आसपास के क्षेत्रों और पर्यावरण की सफाई सामाजिक और बौद्धिक स्वास्थ्य के लिये बहुत जरुरी है। हमें साफ-सफाई को अपनी आदत में लाना चाहिये और गंदगी को हमेशा के लिये हर जगह से हटा देना चाहिये क्योंकि गंदगी वह जड़ है जो कई बीमारियों को जन्म देती है। जो रोज नहीं नहाता, गंदे कपड़े पहनता हो, अपने घर या आसपास को वातावरण को गंदा रखता है तो वो हमेशा बीमार रहता है। गंदगी से आसपास के क्षेत्रों में कई तरह के कीटाणु, बैक्टेरिया वाइरस तथा फंगस आदि पैदा होते है जो बीमारियों को जन्म देते है।जिन लोगों की गंदी आदतें होती है वो भी खतरनाक और जानलेवा बीमारियों को फैलाते है। संक्रमित रोग बड़े क्षेत्रों में फैलाते है और लोगों को बीमार करते है कई बार तो इससे मौत भी हो जाती है। इसलिये, हमें नियमित तौर पर अपने स्वच्छता का ध्यानरखना चाहिये। हम जब भी कुछ खाने जाएँ तो अपने हाथों को साबुन से धो लें। हमें अपने शरीर और चेहरे को तीव्र नहाने से बचाना चाहिये। अपने शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्यके लिये हमें बिल्कुल साफ-सुथरे कपड़े पहनने चाहिये। स्वच्छता से हमारा आत्म-विश्वास बढ़ता है और दूसरों का भी हम पर भरोसा बनता है। ये एक अच्छी आदत है जो हमें हमेशा खुश रखेगी। ये हमें समाज में बहुत गौरान्वित महसूस कराएगी।हमारे स्वस्थ जीवन शैली और जीवन के स्तर कोबनाए रखने के लिये स्वच्छता बहुत जरुरी है।ये व्यक्ति को प्रसिद्ध बनाने में अहम रोल निभाती है। पूरे भारत में आमजन के बीच स्वच्छता को प्रचारित व प्रसारित करने के लिये भारत की सरकार द्वारा कई सारे कार्यक्रम और सामाजिक कानून बनाए गये और लागू किये गये है। हमें बचपन से स्वच्छता की आदत को अपनाना चाहिये और पूरे जीवन भर उनका पालन करना चाहिये। एक व्यक्ति अच्छी आदत के साथ अपने बुरे विचारों और इच्छाओं को खत्म कर सकता है।घर या अपने आसपास में संक्रमण फैलने से बचाने और गंदगी के पूर्ण निपटान के लिये हमें ध्यान रखना चाहिये कि गंदगी को केवल कूड़ेदान में ही डाले। साफ-सफाई केवल एक व्यक्ति की जिम्मेदारी नहीं है बल्कि ये घर, समाज, समुदाय, और देश के हर नागरिक की जिम्मेदारी है। हमें इसके महत्व और फायदो को समझना चाहिये। हमें भारत को स्वच्छ रखनेकी कसम खानी चाहिये कि न तो हम खुद से गंदगीकरेंगे और किसी को करने देंगे।

बुधवार, 4 जनवरी 2017

*सरकारना हकारात्मक वलण ना कारणे वायब्रंट नो कोल पाछो लीधो छे लडत नही*

*सरकारना हकारात्मक वलण ना कारणे वायब्रंट नो कोल पाछो लीधो छे  लडत नही*
          CM साहेब साथे नी आज नी मीटिंग मा थयेली चर्चा
1)   फिक्स बाबते सुप्रीम मा सरकार हकारात्मक एफिडेविट रजू करशे ( 5 वर्ष नी नोकरी कायमी गणाय शके , पगार वधारो मळी शके अने बीजा लाभ मणी शके जेवी शक्यताओ) आ परीणाम 2 वर्षनी लडत ना कारणे मणवानु ज हतु महासमेलनमा आमने फायदो थई गयो एवु कोई ना विचारे....
2) आशा बहेनोने 2 लाख नु वीमा कवच
3) कोन्ट्रक्ट , आउटसोर्सिंग तेमज बीजा शोषित कर्मचारीना डेटा मगावी योग्य वेतन आपवा सरकार कटिबद्ध
4)  खानगी कंपनी मा 85 % गुजरात ना युवानोने रोजगारी आपवा सरकार कटिबद्ध तेमज बाकी रहेली 40000 सरकारी जग्या वहेलि तके भरवा तैयारी...

सरकार द्वारा आवु हकारात्मक वलण दाखववमा आव्यु त्यारे 2 शक्यता होइ शके
1)   सरकार कदाच राजरमत रमी जाय तो वाइब्रन्ट नो कोल पाछो लीधो छे आपणी लडत नही....
    10 तारीखना रोज आपणी तरफेण मा एफिडेविट नही थयु होइ तो बीजा मुदे पण आवु थई शके तो आपणो प्रोग्राम यथावत रहेशे बधा हाजरी आपजो
2)   सरकार हकारात्मक होइ अने आवा समय पर वाइब्रंट नो कोल यथावत राखिये अने एमनी अंदर कोई कर्मचारी नी जोब ने जोखम थाई तो सरकार हकारात्मक होवा छता आवा खराब निर्णयनो भोग मारे अने मारी टीम ए बनवु पडे...
           आप लोकोने मारी अने मारी टीम पर आक्षेप करवा खूब सरण छे परंतु दरेक परिस्थिति मा आपनी नोकरी ने नुकशान ना थाई इ रीते योग्य निर्णय लेवो ए अमारा माटे खूब अघरु छे....3 वर्षथी लडत चलावीए छे जो अमारी दानत खराब होत तो अत्यार सुधी लडत चालु ना होत...तो तमाम मित्रोने विनती के मारी अने मारी टीम पर विश्वास राखे...
    
        प्रवीण राम , रजनीकांत सोलंकी,सुबोध परमार,चंद्रिका सोलंकी , हितेश गुप्ता, पियूष परमार, प्रवीण नकुम , मेहुल बारड
      *जन अधिकार मंच*

सोमवार, 2 जनवरी 2017

*भीम एप्प का उपयोग कैसे करें।*

✔ *भीम एप्प का उपयोग कैसे करें।*

➖1. सबसे पहले Google Play Store से BHIM App Download करें।
➖2. उसके बाद अपने Bank Account को इस App में Register करें।
➖ 3. Register करने के साथ अपने लिए एक UPI Pin Set Up करें।
➖ 4. User का Mobile Number ही उसके Payment का Address होगा।
➖ 5. एक बार आपका Registration पूरा होने के बाद आप अपने Transaction BHIM App में शुरू कर सकते हैं।

✔ *BHIM App द्वारा पूरी जानकारी भीम एप्प पैसे कैसे भेज सकते हैं और प्राप्त कर सकते हैं ??*

➖ 1. BHIM App पर अपने आप अपने दोस्तों, दूर बैठे परिवार के लोगों और उपभोगताओं को भी भेज सकते हैं।
➖ 2.भीम एप्प पर सभी Transaction Registered मोबाइल नंबर यानि की Payment Address पर भेजा जा सकता है।
➖ 3.आप बिना UPI सुविधा वाले बैंकों में भी पैसे Transfer कर सकते हैं।
उसके लिए आप MMID और IFSC सुविधा की मदद ले सकते हैं।
➖ 4.आप किसी अन्य Registered Mobile Number या User से Money Receive करने के लिए Request भी भेज सकते हैं।

✔ *BHIM App में Bank Account के लिए UPI Pin कैसे Set करें?*

➖ 1. सबसे पहले BHIM App के Main Menu में जाएँ।
➖ 2. उसके बाद Bank Accounts को Select करें।
➖ 3. उसके बाद Set UPI Pin, Option को चुनें।
➖ 4. उसके बाद आपको अपने ATM/Debit Card का 6 Digit वाला Number डालना होगा अपने Card के Expiry Date के साथ।
उसके बाद आपके पास एक OTP प्राप्त होगा।
➖ 5. उसको App में Dial करने के बाद आप अपना UPI Pin बना सकते हैं।

✔ *कौन से बैंक भीम एप्प में सपोर्ट करते हैं?*

इलाहाबाद बैंक.. आंध्रा बैंक.. एक्सिस बैंक.. बैंक ऑफ बड़ौदा.. बैंक ऑफ इंडिया.. बैंक ऑफ महाराष्ट्र.. केनरा बैंक.. कैथोलिक सीरियन बैंक.. सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया.. डीसीबी बैंक.. देना बैंक..  फेडरल बैंक.. एचडीएफसी बैंक.. आईसीआईसीआई बैंक.. आईडीबीआई बैंक.. आईडीएफसी बैंक.. इंडियन बैंक.. इंडियन ओवरसीज बैंक.. इंडसइंड बैंक.. कर्नाटक बैंक.. करूर वैश्य बैंक.. कोटक महिंद्रा बैंक.. ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स.. पंजाब नेशनल बैंक.. आरबीएल बैंक.. साउथ इंडियन बैंक.. स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक.. भारतीय स्टेट बैंक.. सिंडिकेट बैंक.. यूनियन बैंक ऑफ इंडिया.. यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया.. विजया बैंक।

*BHIM App से अन्य जानकारियाँ*.

➖BHIM App के इस्तेमाल करने वाले User अपना Balance भी Check कर सकते हैं और अपने Transaction से जुडी जानकारियाँ भी।
➖Users अपने Phone Number पर अदिकतर तौर पर Custom Payment Address भी बना सकते हैं।
➖जल्द से जल्द Transaction को पूरा करने के लिए आप QR Code Scan करने से भी कर सकते हैं।
➖सबसे ज़बरदस्त बात है BHIM App English (अंग्रेजी) और Hindi (हिंदी) दोनों भाषाओं में आप इस्तेमाल कर सकते हैं।

*सरकार का कहना है आप जल्द ही BHIM App को अन्य भाषाओँ में भी उपयोग कर सकेंगे।*

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